भ्रष्टाचार - Corruption
आज भ्रष्टाचार हमारे देश भारत में पूरी तरह से फ़ैल चूका है। भारत में आज लगभग सभी प्रकार के आईटी कंपनियाँ, बड़े कार्यालय, अच्छी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद भी, भारत पूरी तरीके से विकसित होने की दौड़ में बहुत पीछे है। इसका सबसे बड़ा कारण भ्रष्टाचार ही तो है। । चाहे वह समाज का कोई भी व्यक्ति क्यों न हो, सरकारी कर्मचारी हो या कोई राजनीतिक नेता, शिक्षा का कार्य क्षेत्र हो - हर जगह भ्रष्टाचार ने अपना घर बना लिया है। आज भ्रष्टाचार कुछ इस प्रकार से भारत में बढ़ चुका है कि कहीं-कहीं तो भ्रष्टाचार के बिना काम ही नहीं होता है। कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं बचा, जहां भ्रष्टाचार के असुर ने अपने पंजे न गड़ाए हों। देश की सबसे छोटी इकाई पंचायत से लेकर शीर्ष स्तर के कार्यालयों और क्लर्क से लेकर बड़े अफसर तक, बिना घूस के आज सरकारी फाइल आगे ही नहीं सरकती।
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| भ्रष्टाचार - Corruption |
दुनियाभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए तथा पूरी दुनिया को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए 9 दिसंबर को 'अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस' मनाया जाता है। इस दिवस को मनाते हुए सभी सरकारी, प्राइवेट, गैरसरकारी सस्थाएं एवं नागरिक संगठन भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुटता से लड़ाई लड़ने का संकल्प लेते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 31 अक्टूबर 2003 को एक प्रस्ताव पारित कर 'अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस' मनाए जाने की घोषणा की। यूएनजीए द्वारा यह दिवस प्रत्येक वर्ष 9 दिसंबर को मनाये जाने की घोषणा की गयी। भ्रष्टाचार के खिलाफ संपूर्ण राष्ट्र एवं दुनिया का इस जंग में शामिल होना एक शुभ घटना कही जा सकती है, क्योंकि भ्रष्टाचार आज किसी एक देश की नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की समस्या है।
आज हमारे भारत की बात करे तो सरकारी दफ्तर रिश्वतखोरी का बड़ा अड्डा बने हुए हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी राज्य सरकारों के ऑफिसों में होती है। गौरतलब है कि एक सर्वे में 1.90 लाख लोगों को शामिल किया गया। इसमें 64 प्रतिशत पुरुष और 36 प्रतिशत महिलाएं शामिल हुईं। सर्वे में 48 प्रतिशत लोगों ने माना कि राज्य सरकार या स्थानीय स्तर पर सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए हैं।
आज के समय में ईमानदारी तो महज कागज का एक टुकड़ा बनकर रह गई है। हर क्षेत्र में जब तक जेब से हरे-हरे नोटों की गद्दी नहीं दिखाई जाए, तब तक हर काम कछुआ चाल से ही चलता है। न जाने कब पूरा होगा? राम भरोसे ! लेकिन जैसे ही नोटों की गर्मी पैदा होती है, काम में तेजी आने लग जाती है।
इस गर्मी के प्रकोप से बड़े-बड़ों का ईमान पिघलने लगता है। बच्चों का शिक्षण संस्थान में दाखिला करवाना हो, या किसी को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराना हो, बिना मुट्ठी गरम किए होता नहीं है।
भ्रष्टाचार की दीमकें हमारी सारी व्यवस्था को खोखला कर रही हैं। कभी सोने की चिड़िया कहा जाने वाला भारत आज भ्रष्टाचार के कीचड़ में धंस चुका है। हमारे नैतिक मूल्य और आदर्श सब स्वाहा हो चुके हैं। बढ़ता हुआ भ्रष्टाचार आचरण दोष का ही परिणाम है।
आजकल अखबारों, टीवी और रेडियो में एक ही खबर सुनने-देखने को मिल रही है, वह है भ्रष्टाचार की। हर दिन भ्रष्टाचार के काले करनामे उजागर हो रहे हैं। देश में भ्रष्टाचार को मिटाकर सभी नागरिकों को रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना सरकार का काम ही नहीं, बल्कि राजनीतिक धर्म भी होता है। लेकिन आजादी से लेकर अब तक देश की सरकारें भ्रष्टाचार को मिटाने में विफल रही हैं।